सविता कपूर
श्रीमती सविता कपूर जी का जन्म जिला बिजनौर , उत्तरप्रदेश के चांदपुर कस्बे में एक साधाहरण परिवार में हुआ। हुआ। सविता जी के बचपन का नाम 'विमल' था। जैसे सूर्य की किरणों के आते ही दुनिया में उजाला आता है उसी अनुरूप विद्यार्थी जीवन शुरु होने से पहले उनके माता-पिता ने उनका नाम 'विमल' से सविता कर दिया। सविता कपूर जी के पिता बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे तथा मुरली मनोहर जोशी जी के सहपाठी भी रहे। श्री राम अवतार पुलिस में आधिकारी थे और उनके ऊपर अपने छोटे-भाई बहनों की भी जिम्मेदारी थी। । सविता जी अपने बचपन के बारे में याद करते हुए बताती हैं कि बचपन से ही घर में अनुशासन व कर्मठता को वरीयता दी जाती थी। सविता जी ने अपने पिता जी को हमेशा असहायों की मदद करते हुए देखा। दिन का कोई भी समय हो राम अवतार जी हमेशा किसी न किसी की मदद में लगे रहते थे। पिता के साथ-साथ माता सावित्री देवी जी का भी सविता जी के जीवन में गहरा प्रभाव रहा है। उनके संस्कारों ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की दिशा दी है। सावित्री देवी एक साधारण ग्रहणी थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन बच्चों की देख भाल व पालन पोषण में बिताया। विद्यालय के बाद सविता जी ज्यादातर समय अपनी माता के साथ ही बिताती थी। वे बताती हैं आज भी उनके बताए हुए कई ऐसे गुर हैं जो उन्हें मदद करते हैं।
सविता कपूर जी की प्रारंभिक शिक्षा उत्तरप्रदेश के अलग- अलग जिलों में हुई। स्कूली जीवन से ही उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों व समाजिक गतिविधियों में रूचि थी। कोई भी कार्यक्रम होता तो सविता जी उसमें विद्यालय का प्रतिनिधित्व करती । स्कूली जीवन में उन्हें कई पुरुस्कारों से सम्मानित करा गया। अपनी अकादमिक शिक्षा समाप्त करने के पश्चात सविता जी का विवाह हरबंस कपूर जी से 28 जनवरी 1974 को संपन्न हुआ। विवाह के पश्चात श्रीमती सविता कपूर जी ने सारी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वाहन किया । कुछ समय बाद कपूर परिवार में एक सुपुत्री शीतल कपूर तथा दो सुपुत्रों अमित कपूर व अतुल कपूर का जन्म हुआ। दोनों का जन्म हनुमान जी की कृपा से मंगलवार को हुआ। जिन तीनों का पालन-पोषण सविता कपूर जी ने बड़े लाड़ प्यार से करा। धीरे-धीरे सविता कपूर जी का जन मानस से अलग रिश्ता बनने लगा। जब भी किसी महिला को समस्या होती तो सविता जी से देखा नहीं जाता और वे उनकी व्यक्तिगत तौर पर सहायता करती। इन्हीं सब गतिविधियों से वो आम जन मानस में प्रसिद्ध होने लगीं। सविता कपूर जी सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यों में अधिक रूचि रही है । इसी के चलते संस्कार भारती , भारत विकास परिषद, दीन दयाल उपाध्याय प्रतिष्ठान, पंजाबी सभा और खत्री सभा से जुड़ कर अनेक समाजिक कार्य करती रहीं।
सविता कपूर जी को भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा का प्रथम संयोजक बनाया गया। जिसमें उन्होंने कई जिलों में जाकर भारतीय जनता पार्टी से महिलाओं को जोड़ा । साथ ही साथ भारत विकास परिषद में नगर अध्यक्ष,प्रदेश अध्यक्ष और फिर नॉर्थ सेंट्रल रीजन में क्षेत्र प्रमुख महिला का दायित्व का निर्वहन करते हुए सामाजिक कार्य में लगी रही। वर्तमान में कला के प्रति समर्पित संस्था संस्कार भारती के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व है तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान से भी जुड़ी हुई है।
भारत विकास परिषद, संस्कार भारती ,खत्री सभा, पंजाबी महिला सभा आदि संस्थाओं के माध्यम से समाज के वंचित वर्ग की महिलाओं, बालिकाओं को शिक्षा, फीस, पाठ्य सामग्री में सहयोग करना, बेटियों के विवाह में सहयोग करना ।बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण देना। योग शिविर विकलांग सहायता शिविर समय-समय पर लगाना ,पर्यावरण गोष्ठियां और वृक्षारोपण कार्य आदि कार्य कराए जाते हैं ।सविता कपूर जी द्वारा महिलाओं को सिलाई के कोर्स कराए गए तथा जरुरत मंद महिलाओं को सिलाई मशीन भी प्रदान की गई। सविता जी को जब भी किसी परिवार की मदद करने का मौका मिलता है तो वो हमेशा व्यग्तिगत तौर पर उनकी मदद करती हैं
महिलाओं और बच्चों के प्रति उनके विशेष लगाव को देखते हुए जब उनके पास एक रिपोर्ट प्रस्तुत हुई । जिससे पता चला कि उत्तराखंड का पुरुष-महिला लिंगानुपात बहुत निराशाजनक स्थिति में आ चुका है। जिसका अहम कारण कन्या भ्रूणहत्या है। इस घटाना की अहमियत को समझते हुए । उन्होंने तत्काल ही कुछ सुधि जनों के साथ मिलकर 'कन्या जीवन दायिनी समिति' का गठन किया। इसके कार्यक्रमों के अंतर्गत महामहिम राष्ट्रपति जी तथा तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जी को पत्र लिखकर इस स्थिति से अवगत कराया । कन्या जीवन दायिनी समिति ने ' बेटा-बेटी एक समान' जागरूकता अभियान के तहत जगह जगह में नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो , पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता तथा विभिन्न तरह के कार्यक्रमों से जागरूकता फैलाने का काम किया। इस मुहिम का फल ये हुआ कि उत्तराखंड में बच्चे के जन्म से पहले लिंग की जानकारी पर सरकार ने रोक लगा दी।सरकार ने संज्ञान में ले कर पीoएनoडीoटीo एक्ट बनाया जिसमें श्री मति सविता कपूर जी सदस्य रहीं।
उनके पति स्वर्गीय हरबंस कपूर जी के देहांत के बाद भारतीय जनता पार्टी संगठन ने उपयुक्त समझ कर उन्हें विधायक पद का उमीदवार बनाया। सविता कपूर जी इस चुनौती पर खरी उतरी और जनता के सहयोग से भारी मतों से जीती।
विधानसभा समिति में सविता जी संस्कृत भाषा प्रोत्साहन समिती सदस्य हैं तथा राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड एवं सैरोगेसी बोर्ड की भी सदस्य हैं
2020 कोरोना महामारी के लिए याद रखा जाएगा न केवल इस वायरस ने हजारों लोगों की जान ली बल्कि जीवन की रफ्तार को धीमा कर दिया सारा विश्व महामारी की चपेट में आ गया। ऐसे समय में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने विवेक से काम लिया और देशवासियों को इससे लड़ने के लिए मजबूती से तैयार किया । माननीय प्रधानमंत्री जी सुनिश्चित किया कि भोजन ,राशन ,मास्क ,ऑक्सीजन जरुरत मंदो तक हर समय पहुंचे।
रोगनिरोध उपचार के लिए आयुष औषधीय का सेवन करने की सलाह दी। देश में भुखमरी की स्थिति ना बने इसके लिए भोजन राशन मुफ्त व्यवस्था की गई। सविता कपूर जी ने हर प्रकार की सम्भव कोशिश करी कि कोई भी मनुष्य ऐसी महामारी में असहाय महसूस न करे।
सविता कपूर जी अपना सारा जीवन समाज कल्याण को समर्पित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सविता कपूर जी ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में समाज के लिए समर्पित करती हैं। उनकी दृष्टि और सामाजिक सद्भावना ने हमेशा हमें प्रेरित किया है। सविता कपूर जी के जैसे व्यक्तित्वों की आवश्यकता हमारे समाज में बहुत ही महत्वपूर्ण है, और उनके संघर्षों से हमें एक सशक्त और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर करने का मार्ग प्राप्त होता है। वो एक समर्थ समाज की निर्माण में योगदान करने का संकल्प लेके चल रहीं हैं। जो सभी के लिए न्याय, समानता, और समृद्धि का संकल्प रखता है।
हरबंस कपूर जी 4 बार उत्तरप्रदेश तथा 4 बार उत्तराखण्ड से विधायक तथा 2007 में उत्तराखण्ड के विधानसभा अध्यक्ष रहे। सविता जी तथा हरबंस जी दोनों एक दूसरे के पूरक थे। दोनों एक दूसरे का सामाजिक तथा राजनैतिक कार्यों में सहयोग करते थे। वर्ष 1991-92 उत्तरप्रदेश सरकार में ग्राम्य विकास, श्रम, सेवायोजन राज्यमंत्री रहे। उत्तर प्रदेश विधान सभा की याचिका समिति, लोक लेखा समिति, आवास समिति तथा आश्वासन समिति आदि में सदस्य। उत्तराखण्ड की पहली बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड सरकार में शहरी विकास, आवास, श्रम एव सेवायोजन मंत्री, वर्ष 2001-02। उत्तराखण्ड विधान सभा की नियम समिति एवं लोक लेखा समिति के सदस्य, वर्ष 2003-2004। उत्तराखण्ड विधान सभा की आवास एवं व्यवसाय सलाहकार समिति के सदस्य, वर्ष 2004-2005। 12 मार्च, 2007 को सर्वसम्मति से उत्तराखण्ड विधान सभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 'सामाजिक कार्यों में उनके सतत प्रयास उनकी कर्मठता ही दर्शातें हैं'। हरबंस जी द्वारा किए गए कुछ सामाजिक कार्य निम्न हैं। देहरादून में पेयजल की स्थिति को पूर्व की अपेक्षा अधिक संतोषजनक बनाने हेतु विभिन्न योजनाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान।
शहर को चारों दिशाओं से जोड़ने के लिए अति आवश्यक सम्पर्क मार्गों तथा पुलों आदि का निर्माण प्रारम्भ कराने का महत्वपूर्ण कार्य। स्वच्छ एवं हरित प्रदेश के सपने को पूर्ण करने हेतु सदैव प्रयासरत, वृक्षारोपण के असंख्य कार्यक्रमों का आयोजन, मार्गदर्शन एवं भागीदारी तथा नगर की सफाई व्यवस्था के लिए श्रमदान। विशिष्ट सामाजिक सेवाओं हेतु महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड द्वारा दून सिटिजन काउन्सिल द्वारा प्रायोजित प्राइड ऑफ उत्तराखण्ड पुरस्कार से सम्मानित। डॉ. भीष्म नारायण सिंह, पूर्व महामहिम राज्यपाल द्वारा इन्डिया इन्टरनेशनल फ्रेन्डशिप सोसाइटी द्वारा प्रयोजित 'भारत ज्योति' से सम्मानित। "आज स्व. हरबंस आज हमारे बीच नहीं हैं पर उनकी स्मृति व उनके विकास कार्य सदैव हमारे बीच रहेंगे।" वो हमेशा बच्चों की शिक्षा और विकास को प्राथमिकता देते थे। आज उनकी स्मृति में हरबंस कपूर मेमोरियल ट्रस्ट शुरू किया गया है। जिसमें गरीब बच्चों के लिए शिक्षा, खेल कूद में बच्चों को प्रोत्साहन, गरीब बच्चों के लिए कंप्यूटर सीख तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न प्रकार की शैक्षिक व खेल कूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।